Monday, 12 August 2013

हुई सुबह



हो उठी प्रातः
पूरब दिशा लाल
निकला सूर्य

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गूँजते भौरे
खिल उठी कलियाँ
हुई सुबह

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नई ताजगी
खिला-खिला-सा मन
फैला उजाला

      ***

घौंसला छोड़
दाने की तलाश में
निकले पक्षी

      ***

मन में नेह
अलसाई-सी देह
हुई सुबह

      ***

देखो सूरज
हसीन सुबह से
करता प्यार

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खिलती कली
उदित होता सूर्य
नये सपने

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1 comment:

  1. सभी बहुत ही लाजवाब.

    रामराम.

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