Thursday, 9 January 2014

5 हाइकु





डूबता सूर्य
मदहोश-सी शाम
कैसा अंजाम

दिन का कत्ल
रोज करे सूरज
तो भी महान

उम्र की गाड़ी
दौड़ती प्रतिपल
मृत्यु की ओर

लगाए मन
"और-औररटन
पपीहा बन

कविता जन्मीं
पली और बढ़ी भी
मेरे मन में

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